वो मर गये जो मौत से

वो मर गये जो मौत से घबरा के मर गए

हैं वो अमर जो मौत से टकरा के मर गए

 

मर-मर के जो मरे नहीं वो हैं कहां नहीं

रहते थे जो दिमाग में दिल में उतर गए.

 

धधकी जो आग याद की हिम्मत हमें मिली

कदमों के थे निशान जिधर हम उधर गए.

 

मांगा था ख़ून आपने हाज़िर हरेक बूँद

देने को हम उठे ही थे कि वो मुकर गए.

 

घड़ियां जो इम्तेहान की आई है जब कभी

बरबस ‘सुधाकर’ आप समर में उतर गए.

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