गजल

हसीं ख़्वाब कभी हमनें भी दिल में पाला था |
दिल खोल के बैठे थे कोई आने वाला था ||
हम एक किनारे पर माझीं की बाट तकते |
उस पार से माझीं तो आने ही वाला था ||.
हसीं ख़्वाब कभी…………………. कोई आने वाला था ||

मेरा भी कभी कोई, चाहने वाला था |
दिए लाख जलाये थे जश्न वो दीपक वाला था ||
बुझ गए दिए सारे, टुट गए सभी सपनें |
बिन बात पे रूठा है जो मनानें वाला था ||
हसीं ख़्वाब कभी…………………. कोई आने वाला था ||

तुम चाँद भले झूठे पर दिया उजाला था |
वो चाँद चादनी थी या जादू काला था ||
थी चाँद की शीतलता या था गम का सेहरा |
टुट चुका है साकी का प्याला मतवाला था ||
हसीं ख़्वाब कभी…………………. कोई आने वाला था ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9582510029

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