रिश्ते वफ़ा के सब से निभाकर तो देखिए SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल
रिश्ते वफ़ा के सब से निभाकर तो देखिए
सारे जहाँ को अपना बनाकर तो देखिए

इसका मिलेगे अज़्र खुदा से बहुत बड़ा
भूखे को एक रोटी खिलाकर तो देखिए

खिल जाएगा खुशी से वो चेह्रा गुलाब सा
रोते हुए को आप हंसा कर तो देखिए

दुश्मन भी एक रोज़ मिलेगा वफ़ा के साथ
परचम अमाँ का हर सू उड़ाकर तो देखिए

हर राहगीर दिल से दुआ देगा आपको
इस तीरगी में शम्मां जलाकर तो देखिए

खुश्बू से महक जाएगा घर बार आपका
उजड़े हुए चमन को बसाकर तो देखिए

इक चौंदवी का चाँद नज़र आएगा “रज़ा”
जुल्फे रूखे हँसी से हटाकर तो देखिए

सलीम रज़ा रीवा 05-02-2012
9981728122

 शायर  सलीम रज़ा रीवा

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