दासता दर्दे दिल की !!

एक लडकि थी दीवानी सी, एक लडके पर वो मरती थी !
चोरी चोरी चुपके  चुपके उससे मोहब्बत किया करती थी !
कभी हसाती कभी रुलाती, अगर वो रुठ जाये तो उसे मनाती,
हर पल हर लम्हा उसे अपने होने क एहसास दिलाती थी,
वो लडका भि इस कदर उससे प्यार करने लगा,
जीना क्या मरना भी उसके संग ये ख्वाब बुनने लगा,
फिर दोनो ने खायी कसम जिये मरेगे साथ हम,
उन्हे खबर ना थी मगर खुशि के साथ भि है गम,
अचानक एक दिन वो लडकि उस लडके को कहती है,
मै तुमसे प्यार नही क्रर सकती, मै तुम्हारे साथ अब और नही रह सकती,
लडका एकदम चौक गया, ये मेरी जान को अचानक क्या हो गया.
उसे एसा लगा जैसे उसका नसीब सो गयी, उसकी जिन्दगी जैसे बेवफा हो गयी…..
कुछ इस तरह फिर उसने अपना होश सम्भला,
उस लडकी को दिलो जान से उसके शहर जा कर पुकारा…
किसी ने पुछा तेरा दिल क्या है कहता,
तु इन्सान ही तो है उस बेवफा के बीन क्यु नही रहता,
कुछ होश नही रहता कुछ ध्यान नही रहता,
मोहब्बत मे इन्सान इन्सान नही रहता,,,,,,,
फिर वो उसे तलाश इस कदर करने लगा ,
भुका प्यासा दिन रात रहने लगा…
हर गली, हर मोह्हले मे उसे तलाश किया,
हर एक ल्म्हा उसके शहर मे मर मर के जिया….
उस लड्की को उसने फोन किया…. लेकिन उसने उस दीवाने से मिलने से मना कर दिया
लडके के पास थी उस बेवफा कि एक तस्वीर, जीससे खुल गयी उसकी तकदीर,
वो जा पहुचा उसके घर , लेकिन लडकि ने उसे अपनी कसम दे कर उदास कर दिया
अपने दिल से नीकाल कर मानो जैसे खुदा के पास कर दिया…..

आज उन दोनो के बिच मे मिलो कि दुरी है,
और वो बेवफा कहती है, अजय ये मेरी मजबुरी है….

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