हुब्बे यार सताती नहीं है ऐ दोस्त अब “लईक” को

ज़ख्म जो मिले थे बीसवी सदी के बानवे साल में

खिल उठे है फिर से बीसवी सदी के बारवे साल में

 

तुमने कहा था बस एक काम है मैं अभी आया

मैं तो रुक ही गया था उसी मकाम पे उसी हाल में

 

बे दारी ऐ नींद  तो देखो कब आके टूटी है मेरी

जब सब कुछ बदल गया है  इन बीस साल में

 

यह गफलत नहीं थी असर ऐ आसेब था मुझ पर

क्या क्या न मुझ पे गुज़री मैं था किस हाल में

 

यह गफलत नहीं थी असर ऐ आसेब था मुझ पर

क्या क्या न मुझ पे गुज़री मैं था किस हाल में

 

खुदा महफूज़ रख इस बला से असीर ऐ हरीफ को भी

के शेफ़तेह  बद राह न हो कबाहत ओ किताल में

 

जाने क्या कमी हुई परीवश ऐ परवरिश की  देखभाल में

काताला ऐ जान  नाज़िशो नाला है जवानी के उबाल में

 

जाने क्या कमी हुई परीवश ऐ परवरिश की देखभाल में

काताला ऐ जान नाज़िशो नाला है जवानी के उबाल में

 

यह सब हमरी कोताहियो कबहतो का नतीजा है

हमारे अपने करेगे हमें दर बदर कुछ एक साल में

 

यह सब हमरी कोताहियो कबहतो का नतीजा है

हमारे अपने करेगे हमें दर बदर कुछ एक साल में

 

बे शर्मोहया-नंगापन  रुम्जो-इशारा क़यामत का है

आज नहीं तो कल आ ही जाएगी कुछ  ही साल में

 

हुब्बे यार सताती नहीं है ऐ दोस्त  अब “लईक” को

अदमे फुरसती भुला देती है बस दो चार साल में

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