नारी तेरे कितने रूप

नारी तेरे कितने रूप,
कितना छाँव कहाँ तक धूप??
नारी तेरे कितने रूप|

कभी रूप माता का लेकर,
तुमने तन में प्राण दिया|
जीवन संभले, जीवन संवरे,
तुमने अमृत पान दिया|

कितने त्यागों, बलिदानों से,
पूरित है तेरा यह रूप?
नारी तेरे कितने रूप||१||

चंदा सी शीतलता तुझमे,
तू ही चंडी रूप है|
तुझमे भार्या, तुझमे पुत्री,
तुझमे मातृ स्वरुप है|

सूर्य प्रभा मण्डल सा चहुँदिशि,
जग में दमके तेरा रूप|
नारी तेरे कितने रूप||२||

— दीपक श्रीवास्तव

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  1. kuldeep 14/01/2016

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