परिंदा छांव से आया

अभी है गाँव से आया

परिंदा छाँव से आया

 

शहर की धूप में जलने

कि नंगे पाँव से आया।
बड़ी तहजीब लेकर वो

बिगड़ने दाँव से आया।
मधुर कोयल भुला के वो,

थिरकने काँव से आया।

 

यहां फुटपाथ पर ‘शेखर’,

चला मां ठाँव से आया।

चन्द्र शेखर पान्डेय’शेखर’

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  1. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' 19/10/2013

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