पान

क्यों खाते हो पान मसाला,
पान से होता हैअभिमान?
पान में पड़ा केशर लाला।
पान जान सासत में डाला॥
थुकता बारम्बार निराला,
ज्यों जीवन करता मतवाला।
खुसी छिन रही का ला।
सुर-सुर मागे हरदिन आला॥
पान बढावत मान-शान?
जन-जन जाना अજ્ઞાન-જ્ઞાન
रोश से शीश तन मन जाला,
करता है अभिमान नादानी॥
घर-घर में जब सब फटकारे,
राही बेटा बृद्ध जब ललकारे।
आफिस-आफिस सब दुदकारे,
पीच पड़ी ऊपर तो पोंछए।
काल बुलाते बुत पर लोटत,
चबाते खुद को सारा।
हो लो कर लो ध्यान,
वर्ना बच्चा होंगे बेजान॥

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