गंदगी

जिन्दगी में स्वास लेना भी क‌‌ ठिन बंदगी,
जब अपने आप से कह रही जिंदगी।
सिर पर भारी बोझ था जो आ पड़ा,
सोच मे ब्याकुल खड़ी का जिंदगी ?
विसरे दिनो के ख्वाब का सपना कहाँ,
वो उमंगे चाहतें चपला ठिठोली जिंदगी॥
देख कर चारो तरफ काली घटा ,
शहर डूबा सोच मे कब हटेगी गंदगी॥

Leave a Reply