उसको दुश्मन माना है…

भारतवासी हम सब सारे इसको माँ ही जाना है
माँ को जो भी आँख दिखा दे उसको दुश्मन माना है

लूटा मुगलों ने पहले फिर अंगरेजी बाराह मिले
झेल गुलामी को सदियों तक आजादी के सुमन खिले
सत्ता सौंपी नासमझों को राजनीति ही काल हुई
दंश सहा बँटवारे का फिर धरती अपनी लाल हुई
माँ बहनों की लुटी आबरू थू-थू औ धिक्कार हुई
लौह-पुरुष थे सबसे आगे सेना तब तैयार हुई
भाई बनता दुष्ट चीन था सबक न कोई सिखलाया
आँख उठी जब दुष्ट पाक की पटका घर तक पहुँचाया
ताशकंद में छले शास्त्री राजनीति क्या-क्या करती
कूटनीतिवश गयी हाथ से हमने छीनी जो धरती
सत्ता में मदमस्त हो गये भूल गए जिम्मेदारी
लूट रहे वे आज देश वे भाई जिनके ज़रदारी
गद्दारों को सबक सिखा दें हम सबने अब ठाना है
माँ को जो भी आँख दिखा दे उसको दुश्मन माना है

विदेशियों ने हमें धकेला जातिवाद के कचरे में
लुटे-पिटे हम हिन्दू सारे धर्म आज भी खतरे में.
स्वार्थ द्वेष अन्याय बीज क्यों हमने मिलकर हैं बोये
त्याग तपस्या संस्कार आभूषण क्योंकर हैं खोये.
अपना ही है रक्त आज जो मुसलमान कहलाता है.
परिवर्तित हिन्दू भाई है तभी खून का नाता है.
बलप्रयोग से धर्म बदलकर निर्दय हाथों छला गया
बहुत सताया गया उसे था विवश हुआ सो चला गया.
अपनों ने ही गैर कर दिया जिसे प्यार से था पाला
छुआछूत का डंक चुभोकर उसको आहत कर डाला
अरे धर्म के ठेकेदारों उसे प्यार से अपनाते
नहलाकर पावन गंगा में घर में वापस ले आते.
सिंधु किनारे वही पुराना गौरव फिर से पाना है
माँ को जो भी आँख दिखा दे उसको दुश्मन माना है

सविधान में धर्म खो गया केवल कुर्सी से नाता
देश धर्म-निरपेक्ष किन्तु है तुष्टीकरण किया जाता
धर्म-कर्म है छूटा सारा दौलत से ही प्यार यहाँ
नौजवान है नित्य नशे में ठेकों की भरमार यहाँ
पाश्चात्य ने डसा किस कदर इसे देखता कौन यहाँ
गोहत्या होती सड़कों पर सरकारें तक मौन यहाँ
कूटतंत्र का राज आज है छूटतंत्र सबको भाता
देश आज तक बना इंडिया भूल चुके भारत माता
राजनीति का रूप बिगड़ कर पूरा अब तो स्याह हुआ
स्वार्थ आज खा गया सभी कुछ, लालच मिल बाराह हुआ.
कोई सत्ता बिना धर्म के कभी आज तक सफल नहीं
धर्मदंड है सबसे ऊपर, इससे कुछ भी प्रबल नहीं
धर्म-कर्म ही राष्ट्रधर्म है सबको आज बताना है
माँ को जो भी आँख दिखा दे उसको दुश्मन माना है
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पर उग आये आज चीन के अपनी धरती हथियाई
कूटनीति वह पाक खेलता जो था अपना ही भाई
करें बंद व्यापार चीन से उसको सबक सिखाना है
बहिष्कार से ही हारेगा दुश्मन अब निपटाना है
भारतवासी हम सब सारे इसको माँ ही जाना है
माँ को जो भी आँख दिखा दे उसको दुश्मन माना है

— इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

One Response

  1. Dushyant patel 29/01/2015

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