सीतापुर-महिमा गीत

(मत्त सवैया छन्द आधारित)

सीतापुर सबके मन भाये, अपना पावन है ग्राम यहाँ
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

यह अमर शहीदों की धरती, है अमन चैन की आकांक्षी.
जलियावाला था दुहराया , है ‘लालबाग’ जिसका साक्षी.
जब बजा क्रान्ति का बिगुल कभी, हैं उपजे वीर अनाम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

शुभ तपोभूमि ऋषि-मुनियों की, ‘नैमिष’ ‘मिश्रिख’ पावन माटी.
जहँ अस्थिदान देते दधीचि, है त्याग तपस्या परिपाटी.
है चक्र तीर्थ पावन पुनीत, ललिता मैया अभिराम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

राजा विराट का राज्य यहाँ, हरगाँव आज जो कहलाता.
शिवतीर्थ बना ‘गौरीशंकर’, था पञ्च पांडवों से नाता.
अवशेष यहाँ पर हैं अनेक, अति पावनतम हरिग्राम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

है जन्मभूमि टोडरमल की, राजापुर जिनकी थी नगरी.
उनके प्रताप से दुनिया में, अब दमक रही है लहरपुरी.
वह महक रही माटी ‘अम्बर’, जिसमें बसते घनश्याम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

हैं शत-शत वीर कर्मयोगी, ‘मेहरे’, ‘मनोज’ से बलिदानी.
‘मौलाना फजले हक़’ ‘ज्वाला’, मधुसूदन वैद्य महाज्ञानी
कवि ‘संत’ ‘चतुर्भुज’ औ ‘सुजान’,’जुम्बिश’ ‘रियाज़’ का नाम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

हम करें प्रशंसा क्या इसकी, साहित्यिक धरती कहलाती.
कवि संत ‘नरोत्तम’ बाड़ी में, ‘सारस्वत’ अपनी हैं थाती.
‘आलोक’ ‘मधुप’ ‘लवकुश’ ‘पढ़ीस’, का रसमय अवधी धाम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

जब नदी घाघरा उफनाए तब गाँव कटें चुप पुरवासी.
हर साल तबाही गाँजर में, क्यों झेल रहे गाँजरवासी?
इनका भी दर्द सुने कोई, यदि बाँध बने आराम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्रीराम यहाँ…. 2

हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, की अमन चैन की यह धरती.
नित स्नेह-प्रीति की फसल उगे, मन खेत न कोई हो परती.
सब एक बनें दिल नेक रहें, हो नित विकास का काम यहाँ.
मैया सीता का धाम यही, हैं कण-कण में श्री राम यहाँ…. 2

सीतापुर सबके मन भाये, अपना पावन है ग्राम यहाँ……

–इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

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