गजल

आई थी मेरे मोहब्बत में परियों के खुदा होकर
हम भी तो बड़े काफिर बने रस्मो से जुदा होकर
क़यामत भी डर गई थी मोहब्बते अन्जाम से
हर जुल्म को सहा हमने तुम पर फिदा होकर
न किया इश्क की तौहीन न आए हम बाज कभी
हर हालत में रहेंगे तेरे साथ गुलाम सदा होकर
हरि पौडेल

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