गजल

गजल
तेरे बिना मर जाएँगे उठालो मुझे सहारा देकर
बरना डरता है कौन मरने को देखो इशारा देकर
डूबने को ही तो आएँ है यहाँ आँखों में तेरी
न छुडा के जावो अभी हात मुझे किनारा देकर
या खुदा इश्क में बेबफाई क्यों हमें ही मिलती
न जावो छोड़कर ये जख्म फिर दुबारा देकर
साथ तुम रहो तो जन्नत क्या जहन्नुम दे दे
छोड़ के न जाउंगा तुझे दुख्खो का पिटारा देकर
मै नहीं कहता की तेरे काबिल हूँ ऐ खुशनुमा
बच्चों की तरह बहलाऊं तुझे क्या गुब्बारा देकर
हरि पौडेल

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