तेरे खातिर‏

गजल
क्या क्या न किया हमने तेरे खातिर
ये जहर भी पी जाएंगे तेरे खातिर
करलो जी भर के जुल्म जो चाहे मुझपर
ये जख्म भी सह जाएंगे तेरे खातिर
सोचना नहीं हलकी होगी बाते मेरी
हो जाउंगा फिर मै भारी पलड़ा तेरे खातिर
कहने दो लोगों को मै हूँ एक पागल फकीर
बन जाउंगा राँझा फिर एक बार तेरे खातिर
बस एकबार मोहब्बत से इशारा कर दो
तोड़ के आउंगा सारी ईमान तेरे खातिर
हरि पौडेल

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