गजल

दुश्मन होता तो हम भी बचने की सोचते
यहाँ दोस्तों ने ही हमें मार डाला है
अजनवी होता तो हम भी सम्हाल के चलते
यहाँ अपनो ने ही आबरू उतार डाला है
पतझड आती तो उजडती बगिया सभी
यहाँ तो माली ने ही खुद चमन उजाड डाला है
हात पकड के जिसके मस्ती से झुमते थे हम
उसी शक्स ने बिच चौराहे मे पछाड डाला है
जिनके रिश्ते से हम खुद को बहुत खूब समझते थे
उसी रिश्ते ने सारी रिश्ते बिगाड डाला है
हरि पौडेल

Leave a Reply