मुक्त, शुद्ध क्रान्ति

मुक्त, शुध्द, क्रान्ति, स्वतत्रंता-स्वतत्रंता, पुकारती, आज माँ भारती,

ये कैसी आजादी, ये कैसी आजाद नस्लें,

मुफलिस हो रही अवाम सारी, कांटों ही से भरी है गुलाबों की क्यारी

गेहूँ अनाज की जगह लेने आ गई नशे की नशीली फसलें।

नंगे हो गये जंगल सारे, हरियाली की जगह लेने आ गये,काले गोरख धंधे

मां भारती खोज रही वो परचम वो आजादी के झंडे।

कहाँ है आजाद भारत के वारिस, आज भारत का नशे से दम घुट रहा है।

नशे से गिरती दीवारें जिंदगी की, यह छोटे छोटे बच्चे गिरफ्त में नशे के,

क्या चरस, क्या गांजा, क्या शराब, हर तरह से पल रहे, यह बीज वतन के।

यह बच्चे हैं, जिनकी बुनियाद ही थी मदहोशी के बस में,

तब से इनकी भी यही है कसमें, बड़ों के ही नक्शे-कदम हैं, वही निभानी है रस्में,

नशे में रहे हम भी, रहे जमाना हमारे बस में।

बिक रहे बाजार मे नित नई रंगरलियाँ,

तस्वीरें नंगी अधखिली कलियों की, या, खुद अधखिली कलियाँ,

जश्न है  खुशी  का, या फिर, जिस्म की शर्मनाक रस्मे,

नहीं नौजवान आज, किसी के भी बस में।

यह कैसी खिलादी आजादी की कसमें, न, नेता है बस में, न, जवानी है बस में।

भटक रहा बचपन रस्ते पे नशे के, जवानी भी लड़खड़ाये नशे में, बुढ़ापे से पहले,

वक्त से पहले ही ढल चुके हैं, सांसों के तार टूटने से पहले।

कहाँ है वह काँधा जो देश को संभाले, खुद ही गिर रहे हैं, संभालने वाले,

भगत सिंह, आजाद चन्द्रशेखर, चढ़ गये सूली पर, मर गये गांधी गोली खाके,

बन के चाचा, नेहरू ने भी रस्ता दिखाया,

आज तो बन रहे हैं ताऊ, सिर्फ घोटाला दिखाके।

यह आजादी का भारत है, या फिर नशे का।

कहाँ है वह मुहाफिज़ वतन के, जिन्हे नाज़ है अपने मादरे-वतन पे,

माँ के आँचल पे, धरती माँ के हैं बेटे, कहते हैं औरत को माँ, और उन्ही को यह बेचे।

कहाँ है, वह शहंशाह नेते, भरते हैं दम देश का, और देश की ही बेटी खरीदे।

कहाँ है, वह क्रान्ति का आक्रोश कहाँ है, जो विरासत में दे गये थे सुभाषचन्द्रबोस,

वह जोश कहाँ है।

जरा देश के रहनुमा को बुलाओ, कुछ याद नेहरू, गांधी की दिलाओ,

वह नेहरू का सपना, गांधी की रस्में, कैसे चलेगा भारत, कैसी होगी नस्लें।

देश की आजादी है फिर खतरे में, पहले थे फिरंगी,

आज जनता देश की, नशे और भूख से है नंगी,

आमादा हो चुके हैं, देश के आम और खास भी, देश हो नशे में और नशे का गुलाम भी।

कहाँ है, कहाँ है वह निगहबान देश के, देश के वह रहबर कहाँ है

उद्धृत: लेखक की पुस्तक ’ मधु बावरे ’ से

One Response

  1. Ajay Kumar AJAY KUMAR 11/10/2013

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