नादान

मैं हूँ बालक नादान,
नाम है मेरा प्रज्ञान।

परिवार है मेरा पायदान,
रहना नहीं है मुझे अज्ञान ।
पढ़कर बनना है सुजान,
कोई न केवे यह है अज्ञान ।
परिवार होता पिता प्रधान,
बनना है मुझे संस्था प्रधान॥
मैं हूँबालक नादान……..1

करता सभी का मान-सम्मान,
समाज करेगा मेरा बहुमान ।
दुंगा वतन के लिये जान,
माँ देगी तिरंगा कफन ।
करलो मरी यह पहचान,
हूँ भारत माता का जवान ॥
मैं हूँ बालक नादान………2

हर समय रहता है ईश्वर में मन,
वो ही देंगें जीने का वरदान।
दुंगा नित्य भुखों को भोजन,
खुब देंगें ईश्वर मुझे अन्न ।
दुंगा खुलकर समाज को दान,
भगवान ही देंगे खुलकर वरदान ॥
मैं हूँ बालक नादान………3

नरेश पटेल की यही पहचान,
कविता लिखता देश पर कुर्बान ।
लेता हूँ उपहार यह ज्ञान,
नरेश ने ही लिखी है कविता ‘नादान’ ।
करता हूँ पाठकों का मान-सम्मान,
मेरी कविता को पढ़ी लगाकर ध्यान ।
पूरी करता हूँ कविता ‘नादान’ ।
हे भगवान और लिखने का देना मुझे वरदान ॥
मैं हूँ बालक नादान………..4
~~~~~~ कवि नरेश पटेल

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  1. Vikramjeetsharma 09/10/2013

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