प्रिय मिलन “आस”

नैनन नीर धरे खुशियन के ,अधरों पे मुस्कान प्रिये
केशों में घुंघराली लटिका,तुम प्राण प्रिये तुम प्राण प्रिये

तुम मिलन आस में भोर भाई, अंखियों में रैना बीत गयी
है पल पांखुर अन्तः अतुलित ,मनवा का मनका ढेल रही ,
मनमीत बनो तुम प्रीत बनो ,तुम प्यारी मेरी जान प्रिये
तुम प्राण प्रिये तुम प्राण प्रिये

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