यात्रा में चन्द्र वास का फल

सन्मुख होइ जो चन्द्रमा सम्पति देइ अपार |
दक्षिण में सुख सम्पदा का होता बिस्तार ||
पीछे से अति कष्ट दे बाये से धन नाश ||
सन्मुख सब बिधि होत है यात्रा क्लेश विनाश ||

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