शेरो शायरी

दिल की बात क्या करें नजर से भी गरीब हो गये |
बेरहम दिल जले बने फिर भी मेरे नसीब हो गये ||

नजर में प्यार था या नजर में दरार थी |
नजर दरिया दिली या नजर दर्द धार थी ||
क्या गजब ढा गयी तुम्हारी नजाकत नजर |
नजर जिगर पे थी या जिगर के पार थी ||

गैरों ने उनको देखा तो वो उनके नसीब हो गये |
हमने प्यार से देखा फिर भी हम रकीब हो गये ||

प्यार पैदा किया तुमने हमने प्यार को पाला |
प्यार में दर्द जब आया तुम भागे छोडकर पाला ||
प्यार मीठा जहर है या दर्द-ए-गम का कहर है |
प्यार को हम न छोड़ेंगे भले हो ठंढ का पाला ||

धोखे से मिली नजर को हम दिल की नजर मान बैठे |
दिखाई जहन्नुम की राह जिसने उसे ही हमसफर मान बैठे ||

हमें लगा उन्होंने दिल का दिया जला दिया |
दिया की रोशनी से गम का मातम भगा दिया ||
वो कैसा दिया था उनका जो दिल रोशन न कर सका |
दिया ने रोशनी ना दिया सिर्फ दिल को जला दिया ||

उनसे मिलाई नजर तो नजाकत दिखा दिया |
बात दिल की पूँछी तो शराफत सिखा दिया ||

आज मै पूंछता तुमसे तुम बदली हो तो क्यूँ बदली ?
प्यार मैंने किया तुमसे फिर मेरी क्यूँ करी बदली ?
बदली ही जो बनना था तो बनती मेघ की बदली |
बरसती दहकते दिल पर तो हम भी मानते बदली ||

उनकी नजर नजर थी या दर्द-ए-गम का जहर थी |
उनकी नजर मेहर थी या जलजला-ए-कहर थी ||

मेरी शायरी सुन कर जो तेरा दिल नहीं धड़के |
मुझे लगता है दिल मे लग चुके नफरत के है तड़के ||
ये तड़के जो कभी भडके फफोले बन के फूलेंगे |
तुम मरहम साथ मे रखना ये तडके जाने कब भड़के ||

2 Comments

  1. mukesh bajpai 06/10/2013
  2. AmarkantMishra 25/06/2015

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