क्या आज भारत पैदा नहीं करती शूरवीर परशुराम

क्या आज भारत पैदा नहीं करती शूरवीर परशुराम

क्या भारत में अब नहीं बचा महारथी
क्या दुबारा जनम नहीं लेते कृष्णा और श्रीराम
क्या अब जग में कोई नहीं कर्ण जैसा परमार्थी
गुरु की पूजा करे, ठुकराने पर भी प्यार
क्या अब पैदा नहीं होते एकलव्य जैसा विद्यार्थी
इस पॉवर पॉलिटिक्स के दौड़ में मेरे यार
क्या कोई कृष्णा बन सकता अर्जुन का सारथी
क्या सब हो गए हैं सुयोधन से दुर्योधन
अब क्यों सब हो गए है सत्ता के स्वार्थी
कब तक यूँ ही बैठें रहोगें भारत के वीर जवान
क्यों बैठें हो हाथ पे हाथ धड़े, मार कर पालथी
उठों आगे बढों सम्भालों खुदको इस देश को
वर्ना बन जाओगे लाशें, सज रही हैं अर्थिं

 

शशिकांत निशांत शर्मा ‘साहिल’

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