पिंजरे के पंछी रे – नाग मणि (1957)

पिंजरे के पंछी रे , तेरा दादर ना जाने कोए
पिंजरे के पंछी रे , तेरा दादर ना जाने कोए

बहार से तो खामोश रे है तू
बहार से तो खामोश रे है तू
भीतर भीतर रोये रे हाय भीतर भीतर रोये
तेरा दर्द ना जाने कोए
तेरा दर्द ना जाने कोए

कह ना सके तू , अपनी कहानी
तेरी भी पंछी , क्या जिंदगानी रे
तेरी भी पंछी , क्या जिंदगानी रे
विधि ने तेरी कथा लिखी आंसू में कलम डुबोए
तेरा दर्द ना जाने कोए
तेरा दर्द ना जाने कोए

चुपके चुपके , रोने वाले
रखना छुपाके , दिल के छाले रे
रखना छुपाके , दिल के छाले रे
ये पत्थर का देश हैं पगले , कोई ना तेरा होय
तेरा दर्द ना जाने कोए
पिंजरे के पंछी रे , तेरा दादर ना जाने कोए
तेरा दादर ना जाने कोए, पिंजरे के पंछी रे

– प्रदीप

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