राष्ट्र पिता महात्मा गांधी

2 अक्तूबर  1869, जन्म स्थान पोरबंदर ,

बिन हथियार के बन गए दुनिया के सिकंदर ,

सत्य एवं अहिंसा के दिये जिसे माँ ने संस्कार ,

इसी सीख के बल पर कर दिया अंग्रेजों को देश के बाहर ।

 

दक्षिण अफ्रीका से आरंभ की अपनी वकालत ,

सहन नहीं कर पाये अंग्रेज़ो की ज़लालत ,

कर दी अफ्रीका मे ही अंग्रेजों से बगावत ,

बीज बो आए स्वाभिमान का बन कर अंग्रेजों के लिए आफत ।

 

वापस अपने भारत आकर शुरू किया अहिंसात्मक आंदोलन ,

हिल गयी नींव ब्रिटिश राज्य की , जब जनता का मिला समर्थन,

कई बार अनशन किये और किया सत्याग्रह का अविष्कार ,

आजादी की लड़ाई को मिला इससे खूब प्रचार और प्रसार ।

 

अनेक बार arrest करके भेजा गया उनको जेल ,

चरखा चला कर समय बिताया, होगए अंग्रेज़ भी फेल ,

खादी पहन , स्वदेशी का किया प्रचार ,

विदेशी वस्तुओं को जलाकर किया बहिष्कार ।

 

धोती , लंगोटी वाले बाबा से अंग्रेज़ भी आ गए तंग ,

Mass appeal देख कर, वो भी रह गए दंग,

सन 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का जब दिया बुलंद नारा ,

उनके पीछे एकजुट होकर चल पड़ा देश सारा का सारा ।

 

न बंदूक से  न  तलवार से  , आजादी दिलाई अहिंसा के वार से,

राष्ट्र पिता बने हमारे , ऐसे महात्मा थे वो भारतीय परिवार से ,

उनकी philosophy के आज भी देश में है करोड़ों प्रशंसक ,

जब भी कठिनायों से गुजरता है देश वही बनती है हमारी मार्गदर्शक ।

 

आजादी दिलाकर पूरा कर गए वो तो अपना काम ,

मरते मरते  कह गए ‘हे राम हे राम’,

उनके बलिदानों को रखकर सदा याद ,

अपने देश को रखेंगें सदा खुशहाल और आबाद ।

 

आओ आज उनके जन्म दिवस पर हम सब करें उस महापुरुष का स्मरण ,

शीश झुका कर उनकी प्रतिमा के आगे, करें राष्ट्रपिता को कोटि कोटि नमन ,

चलो सब मिलकर इस बात की लेते है शपथ,

नहीं छोड़ेंगे कभी उनका दिखाया सत्य एवं अहिंसा का पथ।।

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  1. Dr Jai 02/10/2013

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