लड़की: एक खिलौना

महज़ एक खिलौना ही तो हूँ मैं,
इसके सिवा और ज़िन्दगी ही क्या है मेरी !

कही माँ की कोख में ही,
जान ले लेते हैं !

कही जन्म दे कर,
ज़िन्दगी भर बोझ समझते हैं !

कही अपनी हवस की आग में सुलगकर,
मेरे जिस्म को भी नोच लेते हैं !

दर्द कैसे होगा मुझे,
जो इंसान मैं नहीं !

इन दरिंदो के हाथ की कठपुतली,
महज़ एक खिलौना ही तो हूँ मैं !!
(20th Sept, 2013)

2 Comments

  1. babasaheb landge 'sarthi' 07/11/2013
    • Shreya Anand Shreya Anand 27/12/2014

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