गजल -मर जाये भले अब हम पर गीत न होंगें कम |

मर जाये भले अब हम पर गीत न होंगें कम |
खुशियाँ तो कहीं जायें पर साथ न छोड़ें गम ||

जो दर्द हुआ हमको वो दर्द न हो तुमको |
तुम दर्द बनों कितना पर याद रहो हरदम ||

सूरज का रंग तुममे सारा ही आ जाये |
जब चाँद सितारे भी हो रंग में तुमसे कम ||

हर एक शायरी से मिल जाय दुआ तुमको |
सरताज भी मिल जायें लुट जायें भले ही हम ||

अब ख्वाब यही अपना हरवक्त यही सपना |
लिखते लिखते नगमें मै तोडूं अपनी दम ||

चढ़ रहा नशा कोई कुछ तो अब होना है |
है मातम या ये गम ना विश्की है ना रम ||

क्यूँ लगा दिया तुमने ये रोग शायरी का ?
है साथ मौत बैठी क्या गजल है आलम ||

ले आओ अब अर्थी तैयार जनाज़ा है |
जा रहा है शिव शायर खुश रहना मेरे सनम ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

9412224548

2 Comments

  1. sunita agarwal 02/10/2013

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