ये पागल कवि

ये पागल कवि और शायर हमेशा गीत क्यूँ गाते ?
न अब भगवान आते है न अब महबूब ही आते ||
हमें भगवान् औ महबूब दोनों एक से दिक्खे |
एक पत्थर है पहले से एक पत्थर से बन जाते ||

जो ज्यादा दर्द देते है दिल के पास हो जाते |
जो रातों को जगाते है कितने खास हो जाते ||
मोहब्बत खेल कैसा है कोई हमको भी समझाए ?
गरूरे हुस्न के नखरे क्यूँ पत्ते ताश हो जाते ||

कोई तो भक्ति पाता कोई दीवानगी पाता |
भक्त में श्रेष्ठता क्या है?जो दीवाना नहीं पाता ||
इसे दीवानगी या फिर पागलपन कहा जाए |
दोनों दुखित होते है आंशू रुक नहीं पाता ||

गीत भगवान् को प्यारे गजल महबूब को भाते |
कविता शायरी महबूब के दिल में समा जाते ||
शायर है नहीं भाते कवि तो पागल लगते है |
दोनों खुश रहें इस रीत से कवि गीत को गाते ||

3 Comments

  1. gopi 30/09/2013
  2. mukesh bajpai 06/10/2013

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