खता

मेरे ही लिए दोस्त बैठे हैं खंज़र लिए मै जानता हूँ,
पर मैं तो दोस्तों ही पर जां निसार करना चाहता हूँ I

जिसने तोड़ा था दिल मेरा कभी अपनी कड़वाहट से,
आज मैं उसकी नफरतों को तार तार करना चाहता हूँ I

हर स्वप्न पूरा नहीं हो सकता मैं जानता हूँ,
फिर भी कुछ सपने हैं जिन्हें साकार करना चाहता हूँ I

ग़र ज़िन्दगी मेरी परीक्षा लेने पर उतारू है ,
तो मै ज़िन्दगी का हर इम्तहान पार करना चाहता हूँ I

मुझे मालुम है उसे नहीं यकीं रत्ती भर भी मुझ पर,
फिर भी मैं बस उससे ही प्यार करना चाहता हूँ I

दिल लेना दिल देना किसने समझी ये बातें प्यार की “चरन”
इश्क खता है तो एक बार नहीं बार बार करना चाहता हूँ II
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गुरचरन मेहता

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