अफवाहों के सच अब खुलने लगे हैं..

अफवाहों के सच अब खुलने लगे हैं,

 

उस किताब के पन्ने अब पलटने लगे हैं,
राज उनके अब खुलने लगे हैं,

हवाओं को तो एक दिन थमना ही था,
अफवाहों के सच अब खुलने लगे हैं,

झूठों के महल तो एक दिन ढलना ही थे,
अब तेरे बंगले के राज खुलने लगे हैं,

तू कितना भी तान ले गले की नसें, चुचुहा ले कितना भी पसीना,
तेरे बोल ही अब तेरी पोल खोलने लगे हैं,

तुमने नहीं दिया हिसाब लाखों का,
लोग अब पाई पाई का हिसाब खोलने लगे हैं,

 

अरुण कान्त शुक्ला

5/8/2013  

 

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