मीरा सूर की कविता

मीरा सूर की कविता कृष्ण को रास आई थी |
तुलसीदास की कविता राम को बहुत भाई थी ||
कविता में गिरावट है मिलावट है नहीं कोई |
कभी कविता हमारी भी तुम्हारे दिल पे छाई थी ||

प्रीत की रीत बदली है या कविता गीत बदले है |
ये अभिशप्त बदली है या फिर मीत बदले है ||
बदली है जो अभिशापित तो फिर कहर बन बरसे ||
हम तो मृत्यु के ग्राहक न बदले थे न बदले है ||

कविता पाठ कर कवि कुल ने देवों को बुलाया है |
मेघ राग की कविता ने जल वर्षा कराया है ||
कृष्ण का रूप कविता में निखर आया हो तो भी क्या ?
मीरा प्रीत बदली ने कृष्ण को ही रुलाया है ||

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