ग़र

ग़र रखते हैं वे यकीं खुद पर हमारी मोहब्बत को खाक में मिलाने का I
तो हमें भी है यकीं अपने प्यार पर, दम है ज़माने भर से टकराने का I

ग़र शौंक है उन्हें यारों के संग यारी का और जज्बा भी है दोस्ताने का I
तो दिल हमारा भी छोटा नहीं  वादा है ज़िन्दगी भर दोस्ती निभाने का I

ग़र दम है मोहब्बत की कीमत अदा करने का, प्यार का क़र्ज़ चुकाने का I
तो हम बनने को हैं तैयार निशाना, दुनिया भर के ताने का, निशाने का I

ग़र नफरत को छोड़ इरादा है उनका, प्रेम गीत गुनगुनाने का I
तो हमारा भी इरादा है नेक, उन्ही के दिल में घर बसाने का I

ग़र उन्हें हक है अपनी ज़िन्दगी से हमें इस तरह हटाने का I
तो हम भी हक रखते है उनकी यादों को दिल से मिटाने का I

ग़र हैं दिल के साफ़ दिल्लगी नहीं आशय है दिल लगाने का I
तो हम भी रखतें हैं हौंसला उनके लिए खुद को भूल जाने का I

ग़र प्यार है सच्चा, इरादा है उनका हमें अपने ख्वाबों में बुलाने का I
तो हम भी रखेंगे दिल का दरवाजा खुल्ला एक, आने और जाने का I

ग़र है निष्ठा, शौंक है उन्हें दिल की गहराइयों में उतर जाने का I
तो हमारा भी अधिकार बनता है उनकी आँखों में बस जाने का I

ग़र एहसास है उन्हें हमारी चाहत का प्यार के अफ़साने का I
तो हम भी करतें हैं फैसला उनके संग ज़िन्दगी बिताने का I

ग़र रखते हैं वो हौंसला “चरन” के नाम, कडवी नीम की पत्तियाँ चबाने का I
तो हम भी कम नहीं शौंक है हमें भी बारिशों में कागज़ की नाव चलाने का II

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गुरचरन मेह्ता 

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  1. Dr Jai 02/10/2013

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