जीवन की कहानी

सुख दुःख की लहरों के बीच , हिच्च्कोले खता जो पानी

शायद उसी पानी के जैसी है , मानव के जीवन की कहानी

लहर सुखो की आती है जब , जीवन सागर खुशियों से भरता

तब कई मित्र और कई सहारे , हाथ बढ़ाकर आगे आते

कहते सुख दुःख के साथी है हम , दिल की खुशियों को और बढ़ाते

पर जब बारी आती दुःख की , लहरें गुम जाती है सुख की

मन इतना व्यथित हो जाता , जीवन में कुछ भी रास न आता

सारे साथी और मित्र सहारे , दुःख में कर लेते है किनारे

पर एक मित्र जो परममित्र है , परमपिता जो सरल चित्त है

आगे बढ़कर वो हृदय लगता , दुःख की लहरों को शांत करता

मन में श्रद्धा विश्वास जगाता , जीवन क्या है ?? यह बोध कराता

सुख दुःख की लहरों में लिपटी , इन दो भावो में जो सिमटी

संघर्षमय लहरों के जैसी है , मानव के जीवन की कहानी

2 Comments

  1. poem 28/10/2013
    • Aarti Shukla 07/11/2013

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