मेरे दर्द

मेरे दर्द को वो
पराया मानती है

मुझको ही बेगाना मानती है

पता नही किसकी याद मे रहती है वो

कुछ दिनो से तो वो हमे पागल मानती है

मगर मै नही समझ न सका

कुछ दिनो बाद मालूम हुया ये

कि वो पागल नही किसी ओर प्‍यार करती है वो

 

 

कवि
…………अजय कुमार बनास्‍या

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