कितना घना कोहरा है ,कहीं उजाला तो हो

कितना घना कोहरा है ,कहीं उजाला तो हो ,
कहीं कोई सूरज , निकलने वाला तो हो .

उसने पेट अपना , घुटने से छिपा रखा है ,
वो ख़ाक बोलेगा उसके पेट में निवाला तो हो .

यहाँ हर कहीं पत्थर की अहिल्यायें है दोस्तों ,
कहाँ है राम कोई, जो तारने वाला तो हो ,

सुना है हर शहर में उनकी एक हवेली है मगर ,
उन्हें नींद नहीं आती, कोई सोने वाला तो हो ,

नाकामियों के किस्से तो हमने सुने है बहुत ,
उनकी बुलंदी की कहानी सुनाने वाला तो हो ,

उनकी फितरत से हम सभी वाकिफ है मगर ,
वे फिर नया आजमाएंगे जो वोट दिलाने वाला तो हो

तन्हाई भी कोई बुरी चीज नहीं होती यारों ,
शर्त ये है की कोई याद आने वाला तो हो .

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