सभी खाँच रहे

॥ गगन मॅगन विजुलियॊ की कौध बॅद हुई!

सऱमिली राति उजाला उगलने लगे धूल सब फाक रहे॥
ग़रल गँगा के रेतीले टीले प्यासे कण कण काँप रहे ।
दीप दीन हीन मुग्ध मन भीगी मिट्टी रात दिन खाँच रहे।।
रिस्ते नातो मेँ कोलाहल अहसास अजनवी झाँक रहे ।
हृदय गरिमामय निर्मल बिमल किसे माथ पकड़ हाँफ रहे।।
धरती धधक रही दावानल हो मानो पर्वत काँप रहे ।
बीर योद्धाओँ को गर्दन मर्दन बिकल बैरी साथ रहे ॥
आतँकबाद गगन मगन मँगल भऱस्टाचार सब भाँप रहे।
केशर भरीक्यारी भीषण रक्तचाप सुखमंगल ताक रहे ॥
शहर भरा बारूदों से अमला लाचार विद्वत काँप रहे ।
गजब गोलगप्पा हाट चाट की वाजार सभी खाँच रहे॥

गगन मॅगन विजुलियॊ की कौध बॅद हुई सभी झॉक रहे ।
सऱमिली राति उजाला उगलने लगे धूल सब फाक रहे॥
ग़रल गँगा के रेतीले टीले प्यासे कण कण काँप रहे ।
दीप दीन हीन मुग्ध मन भीगी मिट्टी रात दिन खाँच रहे।।
रिस्ते नातो मेँ कोलाहल अहसास अजनवी झाँक रहे ।
हृदय गरिमामय निर्मल बिमल किसे माथ पकड़ हाँफ रहे।।
धरती धधक रही दावानल हो मानो पर्वत काँप रहे ।
बीर योद्धाओँ को गर्दन मर्दन बिकल बैरी साथ रहे ॥
आतँकबाद गगन मगन मँगल भऱस्टाचार सब भाँप रहे।
केशर भरीक्यारी भीषण रक्तचाप सुखमंगल ताक रहे ॥
शहर भरा बारूदों से अमला लाचार विद्वत काँप रहे ।
गजब गोलगप्पा हाट चाट की वाजार सभी खाँच रहे॥