बनगमन

अब रथ साज चले राजा बनके!

घर में रोवे मात कौशल्या!

बाहर भरथ दोउ भाई !

तू तो बेटा बन को जइबा!

हीरा लाल कहब हम केको!

अब रथ साज चले राजा बनके!

ऊँच मंदिर चढि दशरथ चितवै !

राम के दर्शन को !

विरछन के जब आड़ पड्तु है!

तज दिनै प्राण खबर नहीं तन को!

अब रथ साज चले राजा बनके !

नँगे पाँव भरथ उठ धावै,

राम के दर्शन को !

तू तो भैया बनके जइबा!

अवध के राज सौपला के के!

अब रथ साज चले राजा बनके!

सुखमंगल मंगल समझावै !

चौदह बरिश भैया बन में रहवै!

अवध के राज सौपिला भैया तोहके!

अब रथ साज चले राजा बनके

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  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 13/08/2017

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