बहाना श्री राम-कृष्ण का

कैकयी का तो बस बहाना था I
श्री राम को वन में जाना था I
श्रवण का क़र्ज़ चुकाना था,
बेटे का फ़र्ज़ निभाना था I
शबरी के बेरों को खाना था,
अहिल्या को पार लगना था I
महादेव का धनुष उठाना था,
जानकी से ब्याह रचाना था I
और फिर श्री परशुराम जी का,
अहंकार भी तो मिटाना था I
असुरों से भयभीत था संसार,
उन्हें मृत्युलोक ले जाना था I
राक्षस – जो बेख़ौफ़ यहाँ थे,
उनको तो सबक सिखाना था I
रावण ने जो दुश्ट कर्म किये,
अंजाम तक उसे पंहुचाना था I
विष्णु जी ने जो अवतार लिया ,
वह काम तो सिरे लगाना था II

लंका दहन तो बस बहाना था I
भक्ति का महत्व दिखाना था I
करवाया जो राम-सुग्रीव मिलन,
उस बाली का वध करवाना था I
सागर को पार कर जाना था,
सिया सुधि उन्हें लाना था I
और फिर सोने की लंका को,
राख में बदल कर आना था I
लक्ष्मण मूर्छित पड़े धरणी पर,
मूर्छा से उनको उठाना था I
इन्द्रजीत का घमंड करना था चूर,
यमलोक का रास्ता दिखाना था I
हनुमंत की छाती में दिखे श्री राम,
भक्त-भगवान्,रिश्ता समझाना था II

गोकुल का तो बस बहाना था I
मथुरा को कंस से बचाना था I
श्री कृष्ण को बस धरती को,
राक्षसों से मुक्त कराना था I
शिशुपाल से छुटकारा दिलाना था,
कामदेव श्राप मुक्त करवाना था I
यशो या देवकी माँ तो बस माँ है,
संसार को यह दिखलाना था I
शरारत का न ठिकाना था,
कान्हा को माखन खाना था I
और कहते हैं मित्रता किसे,
सुदामा के माध्यम से समझाना था I
गीता के उपदेश से,अर्जुन के संग संग,
दुनिया का बेड़ा पार लगाना था II

काश कुछ ऐसे बहाने छा जायें I
श्री राम-कृष्ण फिर आ जायें I
जन्म जन्म के कष्टों से,
मुक्ति वे हमें दिला जायें I
अपने तरकश तीरों से वे ,
राक्षसों का वध करा जायें I
जो मन से रावण कंस है,
उनको वे सबक सिखा जायें I
हमको भी कुछ अपने जैसे,
भक्ति का मार्ग दिखा जायें I
लूटा है जिन्होंने माँ भारती को,
उन्हें यमलोक पंहुचा जायें I
भारत की भोली जनता को,
सच का वे पथ दिखला जायें II
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गुरचरन मेहता

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