ममता की मूरत तुम हो मेरी माँ

ममता की मूरत तुम हो मेरी माँ   

 

तुम ममता की मूरत ,   तुम श्रद्दा का गागर,

तुम स्नेह का अंबर , तुम वात्सल्य का सागर ।

 

पुलकित हो जाती देख कर कान्हा की माखन चोर अदा,

तुम हो वात्सल्य का भंडार, कृष्ण की माँ यशोदा ,

जननी न होकर भी दिया किशन को पूरा दुलार ,

देवकी न भूल पाएगी कभी तुम्हारा यह उपकार ।

 

अपने जाए पुत्र को देख जाता वनवास ,

उफ तक नहीं की जिसने रखा केवल उपवास ,

जिसके वन जाने से शोक मे डूबी सारी अयोध्या ,

त्याग की देवी तुम हो राम की माँ कौशल्या ।

 

असुरो का बढ़ गया जब आंतक,

तब तुमने रूप धारण किया घातक,

लिया तुमने दुर्गा माँ का अवतार ,

महिषासुर जैसे राक्षसों का किया संहार ।

 

अग्नि परीक्षा देकर किया सिद्ध स्वयं को पवित्र ,

ऐसा था माता जानकी  का   महान चरित्र ,

राम की मर्यादा के खातिर जिसने छोड़ी राज सत्ता  ,

लव ,कुश को उच्च संस्कार देने वाली तुम हो माता सीता ।

 

नैतिकता का जिसने पढ़ाया सदा पाठ ,

निर्बल की रक्षा करने की बांधी पुत्र के गांठ ,

स्वराज और स्वाभिमान की दी जिसने सदा दुहाई

शिवाजी को वीरता का पाठ पढ़ाने वाली थी माँ जीजाबाई।

 

राजा हरिशचन्द्र की कहानियां सुनाकर किया सदा प्रेरित ,

सत्य मार्ग अनुसरण करने के लिए किया सदा उत्तेजित,

अहिंसा का मार्ग दिखाने वाली उनकी आई(माँ),

ऐसी थी गांधी जी की माता  पुतली बाई।

 

हिमालय की गोद से निकली है जिसकी जल धारा ,

जिसका जल है सारे जग में सबसे न्यारा ,

जिसके शीतल जल में स्नान करके मन हो जाता है चंगा ,

सब के पापों को धोने वाली है वो माँ गंगा।

 

 

जिसकी आँखें हो जाती थी कुष्ट रोगियों की सेवा करते नम ,

जिसने भारत में की सेवा , लेकर अल्बानिया में जन्म  ,

जिसने अपनाई अपने व्यवहार में सदा समता ,

ऐसी थी  हमारी Mother Teressa की ममता ।

 

तेरे आँचल में छुप कर ,चाहे हवा चल रही हो सर्द ,

तेरे बच्चे भूल जाते है अपना सारा दुख दर्द ,

तुम ममता की मूरत ,तुम श्रद्दा का गागर,

तुम स्नेह का अंबर , तुम वात्सल्य का सागर ।

तुम हो मेरी माँ 

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