तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब

तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब

 

एक  बोतल शराब की कीमत तुम क्या जानो ,

उसमे छुपे लाल रंग का नशा तुम क्या पहचानो,

क्यों करते हो इस सुंदरी से इतनी नफरत ,

दे कर तो देखो कभी इसे अपनी मोहब्बत ,

कभी खुली आँखों से देखा है तुमने ख्वाब ?

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

चाय पी  कर ही तुमने तो तसल्ली कर ली जनाब ,

कभी पी कर तो देखो यह मदिरा है बड़ी लाजवाब ,

इसके पीने वालों की बढ़ रही है दिनो दिन तादाद,

यूं तो बिन पिये भी तो लोग हो रहे है बर्बाद ,

एक ही झटके में बना  देगी तुम्हें सल्तनत का नवाब ,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

दो अजनबियों को भी बना देती है अंतरंग,

जब सिर पर चढ़कर बोलता है इसका रंग ,

इसका रंग वाणी में ला देता है अँग्रेजी,

Active हो जाता है बड़े से बड़ा lazy,

कभी सोचा है तुमने इस सवाल का जवाब,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

आम आदमी को बना देती है मुकद्दर का सिकंदर ,

जब जाते हैं इसके सनसनाते पैग पेट के अंदर ,

रात कैसे गुजरी पता नहीं  , सोते है शराबी बेखबर ,

बस सुबह झेलना होता है दारू का hangover,

फिर क्यों कहते हो बिन बात इसे तुम खराब,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

कभी किसी शराबी को झूठ बोलते नहीं देखा ,

सदा उसको दिल का दर्द बयानते ही है देखा ,

तुमने तो शराबी को सदा ही मारा ताना ,

कोशिश करके कभी शराबी की तकलीफ को जाना ?

कहीं और नहीं देखा दिल और दिमाग का यह सैलाब,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

मुझे क्यों कहते हो शराब का मोहताज ,

मेरे पीने पर तुम क्यों करते हो ऐतराज,

इसको पी कर दुश्मन भी खोल देते है राज ,

निकलने लगते हैं मुख से, छिपे हुए अलफाज ,

कितनी पी,कब कब पी, मैंने तो रखना छोड़ दिया हिसाब ,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

गम भुलाने के लिए मैं तो जाता हूँ मदिरालय,

मुझे तो नजर आता है वो बेसहारों का विद्यालय ,

अपने कालेज में भी नहीं पाई होगी ऐसी education,

पल भर में दूर कर दे जो तुम्हारा सारा frustration,

कभी पढ़ी है बैठ कर इसकी भी library की किताब,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

 

 

मुझे पता है, तुम्हारे पास है नहीं इसे पीने का permit,

पर तुम कदापि नहीं करोगे इस बात को admit,

मेरी क्या मजाल इससे मैं दूर जाऊँ,

मैं तो दिन प्रतिदिन इसके आगे शीश झुकाऊँ,

मुझे क्यों टोकते हो ,ओढ़ के शराफत का नकाब ,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

शराब पीने से नहीं हो जाता है कोई पापी ,

यह तो सोमरस है , यह तो है सर्वव्यापी,

मत करो चर्चा- ए-शराब गुण दोष ,

मुझे तो हो जाने दो शराब में मदहोष,

कौन रोक सकता है इसका natural बहाव ,

अरे तुम क्या जानो , तुमने तो पी नहीं कभी शराब ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Reply