आंसू पोंछ तू अपनी हिंदी

आंसू पोछ तू अपनी हिंदी,
ओझल आंखे क्यों टोकेगी ।
विश्व व्यापी तू इतनी हिंदी,
अमीर आंगन वाले क्यो रोकेगे।
तू तो सागर खुद हो हिंदी,
नाले-नाली क्यो कोसेगे ।
अंजन-अंज सार – अंज तू,
कण-कण मे हिंदी खौजेगे ।
अमी असम अमरीकन हिंदी,
गृह-गृह कण- कण मे देखेगे ।
हिंदी तू हिन्दुस्तान की भाषा,
वह बोले है कन की भाषा।
वह बोले बड़ वार की भाषा,
हिंदी हिंद हिंदुस्तान की भाषा ।
हिंदी तू दीदार की भाषा,
हिंदी तू परिवार की भाषा ।
हिंदी तू वान की भाषा,
हिंदी भक्ति काल की भाषा।
हिंदी ना तलवार की भाषा,
हिंदी तू हरिद्वार की भाषा।
हिंदी ना बस मेवाड़ की भाषा,
हिंदी तू जन-जन की भाषा।
हिंदी तो है प्यार की भाषा,
हिंदी तो सत्कार की भाषा ।
हिंदी तू उद्गार की भाषा,
सुना था सबमे प्यार की भाषा ।
जन-जन के उद्धार की भाषा।।
निर्भय निर्मल प्रेम की भाषा ,
हिंदीतू प्रग्या की भाषा ।
हिंदी ही है शक्ति की भाषा ,
हिंदी तू शिव-शक्ति की भाषा।
हिंदी तू जन- गण की भाषा,
हिंदि त तन-मन की भाषा ।
विश्व विदित विजयी तू हिंदी,
वारि बार सब देखे हिंदी ।
हिंदी ना तु राज्य की भाषा,
हिंदी ना तू राष्ट्र की भाषा ।
हिंदी ना तू सरकार की भाषा ,
हिंदी तू जन-मन की भाषा।।
हिंदी तू संग-संग की भाषा,
कण-कण मे करूण की भाषा ।
विस्व मे वरूण की भाषा।
भाई-भाई मे प्यार की भाषा ,
मातु पिता सत्कार की भाषा।
गुरु जन मे तू ग्यान की भाषा,
नारायण मे नाम की भाषा ।
समरसता जीवन की भाषा,
हिंदी तू उद्गार की भाषा।।
नीचे ऊपर दायें बायें,
जहां भी देखो होगी हिंदी।।

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