गजल

है गिला नहीं तुमसे दिल दर्द जगाने का |
वो शौक तुम्हारा था सर दिल पे चलाने का ||
तीरन्दाजी में तो हो तीर निशाने का |
ये शौक हमारा है दिल खून बहाने का ||
है गिला नहीं ……………….सर दिल पे चलाने का ||

हुआ शौक चाँद को अब ज्वाला बन जाने का |
ये शौक पतंगे का खुद जिस्म जलाने का ||
ये किस्सा पुराना है बादल के बहाने का |
चातक का शौक कैसा स्वाती जल पाने का ||
है गिला नहीं ………………….सर दिल पे चलाने का ||

है अजब शौक तुममें पत्थर बन जानें का |
ये गजब शौक हममे मूर्तिपत्थर की बनानें का ||
जो जगा शौक तुममें है दिल को जलाने का |
तो शौक जगा हममें मर मिट जल जानें का ||
है गिला नहीं …………………….सर दिल पे चलाने का ||

Leave a Reply