एक सवाल …

एक सवाल झन्झोड रहा है म्रे मन को बार बार,
शादी के रिश्ते का आखिर क्या है सार !!

अपने सालों पुराने रिश्तों को छोड कर
आती है एक घर की कली बसाने को नया सन्सार
न होता है वो घर अपना न वो लोग बनते है अपने कभी
मिलती है जिन्दगी मे तो बस रुस्वायी और परायापन
जिस्का दामन थाम के रखती है कदम
वही बाद मे बदल देता है उन्की सम्पूर्न पेह्चान
शादी के बाद न मिलता है पति न घर का प्यार !!

एक सवाल झन्झोड रहा है म्रे मन को बार बार,
शादी के रिश्ते का आखिर क्या है सार !!

हर बात पर मिलती है झिद्की यही,
अगर चाहिये था मां का प्यार तो नही करनी थी शादी यार
मां बनके नयी जिन्दगी लाती है धरती पे वो,
फिर भी उसी वारिस के नाम पे
आखिर क्यो लगा दी जाती है उसकी ही खुशियां दांव पर हर बार!!

एक सवाल झन्झोड रहा है म्रे मन को बार बार,
शादी के रिश्ते का आखिर क्या है सार !!

मर्द है तू इस बात का इत्ना अहेन्कार कैसा,
आया तु दुनिया मे नारी के हिइ कारन
जिसे पूजना चाहिये उसे तोड दिया तुने
जिस्की खुशियों का मालिक बना,
बेपनाह दर्द से भर दी उसकी दुनिया तुने,
अरे नादन बनेगा तू भी एक दिन बाप क्यो भूल बेठा है ये सच्चाई ,
लाड्ली तेरी भी घर जाएगी किसी अजनबी के,
वही इतिहास जब दोहराएगा भविश्य
क्यो अभी से कर रहा उस्की तैयारी मेरे यार !!

एक सवाल झन्झोड रहा है म्रे मन को बार बार,
शादी के रिश्ते का आखिर क्या है सार !!

क्यो उस्की जिन्दगी उसकी अपनी नही होती,
पती और बच्चों के बीच क्यों वो पिस्ने को मजबूर है,
पहले मां बाप फिर पति सबके बन्धन मे रह्ती है,
और आखिर कार जब सास बनती है
तो फिर खुद ही क्यो औरत पर ही करती है वार!!

एक सवाल झन्झोड रहा है म्रे मन को बार बार,
शादी के रिश्ते का आखिर क्या है सार !!

क्यो भूल जाती है दर्द जो उस्ने सहा,
मां का प्यार क्यो नही दे पाती एक सास
बेटे के लिये प्यार बहु के लिये फट्कार
आखिर कब खत्म होगा ये अत्याचार
दर्द का ववही अम्बार क्यो परोसती है पीडी दर पीडी ,
क्यो नही चाह्ती वो खुशियो से भरा रहे उसकी बहु का सन्सार !!

एक सवाल झन्झोड रहा है म्रे मन को बार बार,
शादी के रिश्ते का आखिर क्या है सार !!

One Response

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 21/09/2013

Leave a Reply