जननायक की जय हो

जननायक की जय हो

फूट गए जन-जन के किस्मत
जब खलनायक ही अधिनायक
क़ोम -क़ोम में लहू बहाकर
कहलाते खुद को जननायक

शाख -शाख पर उल्लू बैठे
साध रहे सब अपना मतलब
जिस माता की कोख से जन्मे
उसे उझाड़े क्रूर खल नालायक

भारत माँ का भाग्य विधाता
किसकी करनी किसको भरनी
बस लाश गिरे, हो हिंसक बस्ती
है कुटिल इरादा कुरसी मिलनी

उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम
धुं -धुं कर हर दिशा जले
मारो काटो अमन चैन को
नफरत का नंगा नाच चले

चाहे पराजीत हो प्रजातंत्र
चाहे जनतंत्र की कुर्बानी हो
कीमत कितनी भी लग जाए
गूँजे अधिनायक की जय हो

रो-रो कर जन-जन पुकारे-
जय हो,जननायक की जय हो

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