बड़ी मज़बूरी है

कैसे साधे इस पे निशाना, बड़ी मज़बूरी है
मौन कुर्सी की टाँगे, इसने ही टिका रखी है
सबूत हटाये इन्ही हाथों से, बड़ी मज़बूरी है
उसके हाथों ने चाबी ,कुर्सी की थाम रखी है

गुम करनी थी ये फाइल, बड़ी मज़बूरी है
कुछ स्याह तस्वीरे उसमे भी लगा रखी है
थी टावर में कुछ गड़बड़, बड़ी मज़बूरी है
कई काली चोंचों ने, गर्दन जो दबा रखी है

सर्किट से पकड़ना आग, बड़ी मज़बूरी है
जलते कुछ कागज ने, साख बचा रखी है
लछमी का गिरते जाना, बड़ी मज़बूरी है
जानो हूँ खिलौना,चाबी कहीं ओर रखी है

मजदुर के घर भी रोटी, बड़ी मज़बूरी है
बस वोटों तक प्यारे, कंठी पहन रखी है
तेरी बासी बस्ती में हम, बड़ी मज़बूरी है
हैं पक्के सियार ,गाय की खाल रखी है

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