मैं और मेरी कविता|

सालों बाद

आज

बहुत सालों बाद

एक बार फिर

मुझे अपनी कविताओं की याद आई

और मैं लगा पलटने

अपनी पुस्तक के पन्ने

 

पन्नों से निकल निकल कविताएँ

मेरी कृतियाँ

लगी कसने फब्तियाँ

कहो कवि,

कैसे हो? क्यों आई फिर हमारी याद

इतने सालों के बाद?

हमें कर पुस्तकबद्ध

हो गये थे तुम निश्चिंत|

One Response

  1. Dr Jai 20/09/2013

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