गीत

जो थे अजीज अपने ,दौलत में फिसल गये |
ठोकर दिल पर मारी, अब तो वो बदल गये ||

क्या वादे थे उनके, क्या खायीं थी कसमें ?
क्यूँ ख्वाब दिखाए थे क्यूँ जगा दिए नगमे ?
क्या देखा था हममें ,हम पर क्यूं फ़िदा हुए ?
शोहरत की भूख में क्या वो सब कुछ निगल गये ?
जो थे अजीज अपने …………………अब तो वो बदल गये ||

दौलत की मुहब्बत ही, उनके लिए सोना है |
हम जैसे गरीबों को ,जीवन भर रोना है ||
अब क्या क्या होना है ,दौलत की रौशनी में ?
बिन दौलत के दिल पर, वो जहर ही उगल गये ||
जो थे अजीज अपने …………………अब तो वो बदल गये ||

कल तक तो चाहते थे औ मेरी चाहत थी |
उनकी चाहत से तो हमको भी राहत थी ||
उनकी ये कहावत थी कि दिल तोड़ते है जालिम |
दिल तोड़ छोड़ करके वो कैसे निकल गये ?
जो थे अजीज अपने ………………….अब तो वो बदल गये ||

ये ख्वाब हमारा था बन जाये प्रेम किस्सा |
किस्से में उनका भी हम जैसा हो हिस्सा ||
बदकिस्मत निकले हम ,वो मुझसे रूठ गए |
गुस्से में आकरके , किस्से से अलग गये ||
जो थे अजीज अपने …………………….अब तो वो बदल गये ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
०९४१२२२४५४८,,०९५८२५१००२९

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  1. harsh bhati 20/09/2013

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