प्रतीक्षा

एक दीपक हम जला लें ,एक दीपक तुम जला लो

आध्य मुग्धा यामिनी में ,मीलित पुष्पों को खिला लो

तिमिर का निहार छाए,हर विहंगम नीड़ जाये

झींगुरो की तंकस्वर ध्वनि,निड्जो का शांत ,कलरव

खड़ा हूँ मैं निशा मुख पर ,तारकों को अब बुला लो

एक दीपक हम जला ले ,एक ………………………………….१

गहगहा कर तिमिर पथ पर ,तरुण यामिनी मत्त है

देख छीरज बादलों से ,मुदित हो अनुरक्त है

नै त है अब मिलन का ,पथ है ख़ाली पग बढ़ा लो

एक दीपक हम जला लें ,एक ……………………………………२

अंक में अब निशा के ,चन्द्र स्थिर शान्त है

क्लांत हो नक्छत्र गण,छायापथों पर सुप्त हैं

सलिल शीतल मंद बहती ,हो रहा विहान है

बूंद आवस पान करके ,प्यास अपनी अब बुझा लो

एक दीपक तुम जला लो ,एक …………………………………३

आरक्त होता व्योम चहुँधा ,संकेत है रवि आगमन

हो लजीला चन्द्र देखो ,जा रहा है यामिनी संग

विहग-रव  से विकल होकर ,पुष्प कलियाँ खिल रहें हैं

है सुवासित ब्रम्ह -वेला ,त्याग निद्रा गीत गा लो

एक दीपक हम जला लें ,एक दीपक तुम जला लो .

4 Comments

  1. Dr Jai 20/09/2013
    • dr.pradeep k tripathi UTPAL 26/10/2013
    • dr.pradeep k tripathi UTPAL 26/10/2013

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