गजल

गजल
शुक्रिया जो आप आयी मुझे याद दिलाने
वैसे भी कभी हम भुला न पाए थे
लौट के आयी फिर प्यार जताने के लिए
बैसे भी कभी हम बुला न पाए थे
जब भी देखा आपको बनजाता जैसे गुङ्गा
चाह कर भी मुह कभी हम खुला न पाए थे
हरि पौडेल

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