इंतज़ार

जानती हूँ मैं, नहीं वक़्त मेरे लिए तुम्हारे पास
फिर भी करती हूँ हर दिन, हर पल तुम्हारा इंतज़ार
चौंक उठती हूँ हर आहट से
कहीं ये तेरी दस्तक तो नहीं
टकटकी बांधे बैठी रहती हूँ चौखट पे अपनी
की उम्मीद है इस दिल को, आओगे तुम किसी रोज़ मेरे दर पे कभी
आजाओ के अब इन्तहा हो चली है
इन आँखों से अब और इंतज़ार होता नहीं है
तरसती हैं मेरी आँखें तेरी एक झलक  पाने को
के बेक़रार है दिल तेरे करीब आने को
तुझे क्या खबर इस इंतज़ार में भी कितना मज़ा है
तेरे इंतज़ार में हर पल तुझे बेहद करीब पाया है
यकीन है मुझे अपनी दुआओं पर
की आओगे तुम एक रोज़ मेरे बुलाने पर
इसी आस में हर दिन करती हूँ इंतज़ार तुम्हारा
आओगे इक दिन और ख़त्म होगा ये इंतज़ार हमारा

2 Comments

  1. Dr Jai 20/09/2013
    • Gunjan Upadhyay Gunjan Upadhyay 05/04/2014

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