क्या रक्खा है ?

दुश्मनी की बात करते हो दोस्ती में क्या रक्खा है ?
मरने की बात करते हो ज़िन्दगी में क्या रक्खा है ?

ज़िन्दगी तो संघर्षों का नाम रही है शुरुआत से ही,
अंजाम की बात करते हो, आगाज़ में क्या रक्खा है ?

चले आओ मेरे परिंदों लौट कर अपने आसमान में,
देश की मिटटी से खेलो, दूर-दराज़ में क्या रक्खा है ?

नशा करना चाहते हो, चलो चलें हुस्न के मैखाने में,
दो घूंट पी लो इश्क की, शराब में क्या रक्खा है ?

हंसी, कमसिन, नाजुक, सभी अदायें हैं तुममें सनम,
लोग क्यूँ कहते हैं, प्यार की दास्तान में क्या रक्खा है ?

ग़मों से बेज़ार होकर जीना, इसे जीना नहीं कहते,
ख़ुशी के दो पल न हों, तो पुरे जहान में क्या रक्खा है ?

तुम कहाँ-हम कहाँ, जीना मुश्किल है अब यहाँ
तेरे बिन दुनिया के ऐशो-आराम में क्या रक्खा है ?

दिन में नहीं, तो चले आओ रात में कभी ख्वाबों में,
लोगों के हाथ जो भेजते हो, पैगाम में क्या रक्खा है ?

कितने दिनों के बाद मिलें हैं, हम जिगरी दोस्त “चरन”
आओ गले लग जाओ, ये दुआ सलाम में क्या रक्खा है ?
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गुरचरन मेह्ता 

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