आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं

आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं
 
नजरो को सकते वोह बेताब बैठे हैं
 
कोई उलझन है मन में तोह पूछ लूं
 
लेकिन उनकी आँखों में तोह ख्वाब से दहके हैं
 
जिस घडी जिस मोहलत में वोह शराब से बहके हैं
 
खुदा न खस्ता हम खुद को ही दोष दिए बैठें हैं 
 
बहके से दोनों ही हैं दरमियान अक सवालात लिए बैठें हैं 
 
आँखों के गलीचे में वोह चुपचाप बैठें हैं

7 Comments

  1. Gunjan Upadhyay Gunjan Upadhyay 17/09/2013
    • Neha Tiwari Neha Tiwari 18/09/2013
  2. Dr Jai 20/09/2013
    • Neha Tiwari Neha Tiwari 21/09/2013
    • Neha Tiwari Neha Tiwari 21/09/2013
  3. Neha Tiwari Neha Tiwari 23/09/2013

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